Sthree Suraksha Scheme: क्या बंद होगी ‘स्त्री सुरक्षा’ पेंशन योजना? मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने विधानसभा में दिया बड़ा बयान

Sthree Suraksha Scheme को लेकर केरल की राजनीति में एक बार फिर गरमागरम बहस छिड़ गई है। केरल के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने राज्य विधानसभा में स्पष्ट किया है कि सरकार इस बात की गहन समीक्षा करेगी कि ‘स्त्री सुरक्षा’ महिला पेंशन योजना को आगे जारी रखा जाए या नहीं। विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान विधायकों द्वारा पूछे गए तीखे सवालों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने यह बात कही। आइए विस्तार से जानते हैं कि क्या है यह ‘स्त्री सुरक्षा’ योजना, इसे लेकर क्या विवाद हैं और मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने इस पर क्या निर्णय लिया है।

Sthree Suraksha Scheme: कब और क्यों शुरू हुई थी यह योजना?

यह योजना मूल रूप से पिछली एलडीएफ (LDF) सरकार द्वारा चुनाव से ठीक पहले 1 नवंबर 2025 को एक सरकारी आदेश के माध्यम से लागू की गई थी। इसके बाद फरवरी 2026 में इसके तहत पहली किस्त का भुगतान भी कर दिया गया था, जिससे लगभग 10 लाख से अधिक गरीब महिलाओं और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को आर्थिक लाभ मिला था।

इस Sthree Suraksha Scheme का मुख्य उद्देश्य उन गरीब परिवारों की बेरोजगार महिलाओं (उम्र 35 से 60 वर्ष) को ₹1,000 प्रति माह की वित्तीय सहायता देना था, जो किसी अन्य सामाजिक सुरक्षा पेंशन के दायरे में नहीं आती थीं। अधिक प्रामाणिक सरकारी योजनाओं और नीतियों की जानकारी के लिए आप ISRO Official Website जैसी आधिकारिक राष्ट्रीय पोर्टल्स की मदद ले सकते हैं। 

लाभार्थियों की सूची पर उठे गंभीर सवाल: क्या था मुख्य विवाद?

मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने विधानसभा के पटल पर बताया कि यूडीएफ (UDF) सरकार इस योजना को पूरी तरह बंद करने का दावा नहीं कर रही है, लेकिन इसके क्रियान्वयन और लाभार्थियों के चयन में कई गंभीर खामियां पाई गई हैं। 

  • बिना वेरिफिकेशन के चयन: मुख्यमंत्री का आरोप है कि चुनाव से ठीक पहले बिना किसी जमीनी स्तर (Field-level verification) की जांच के पंचायत सचिवों द्वारा आनन-फानन में यह लिस्ट तैयार की गई थी।
  • डेटा के दुरुपयोग का आरोप: चुनाव के दौरान इस योजना के लाभार्थी डेटा का इस्तेमाल चुनावी प्रचार के लिए किए जाने की शिकायतें भी तत्कालीन मुख्य निर्वाचन अधिकारी को मिली थीं।
  • अपात्र लोगों को शामिल करना: शुरुआती सूची में जहां 31.34 लाख लाभार्थी पाए गए थे, वहीं बाद में इसे घटाकर 16.4 लाख कर दिया गया था, जो चयन प्रक्रिया में बड़ी कमियों को दर्शाता है। 

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निष्कर्ष 

Sthree Suraksha Scheme पर मुख्यमंत्री का यह बयान स्पष्ट करता है कि सरकार कल्याणकारी योजनाओं में पारदर्शिता लाने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के लिए यह नीतिगत बदलाव और इसके मुख्य आंकड़े (जैसे योजना की शुरुआत और आयु सीमा) बेहद महत्वपूर्ण हैं।

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