Marry Kom: मैरी कॉम: संघर्ष से शिखर तक पहुँची भारत की बॉक्सिंग क्वीन

Marry Kom: From Struggle and Poverty to India’s Boxing Queen

मैरी कॉम(Marry Kom) का नाम आते ही भारत की बेटियों की ताकत, हिम्मत और आत्मविश्वास की तस्वीर सामने आ जाती है। एक साधारण किसान परिवार में जन्मी यह लड़की दुनिया की सबसे महान महिला मुक्केबाजों में शामिल हो गई। उन्होंने न केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन किया, बल्कि यह भी साबित किया कि अगर इरादे मजबूत हों तो कोई भी सपना असंभव नहीं होता।

प्रारंभिक जीवन और पारिवारिक पृष्ठभूमि

मैरी कॉम (Marry Kom:)  का पूरा नाम मैंगते चुंगनेइजांग मैरी कॉम है। उनका जन्म 24 नवंबर 1982 को मणिपुर के चुराचांदपुर जिले के एक छोटे से गांव कांगाथेई में हुआ था। उनके माता-पिता खेतों में काम करने वाले साधारण किसान थे। आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी, इसलिए मैरी कॉम (Marry Kom:)  ने बचपन से ही मेहनत और संघर्ष को करीब से देखा। स्कूल जाने के साथ-साथ वह घर के कामों में भी हाथ बंटाती थीं। उनका बचपन अभावों में बीता, लेकिन सपने बहुत बड़े थे।

खेल के प्रति रुचि और बॉक्सिंग की शुरुआत

शुरुआत में मैरी कॉम (Marry Kom:) को एथलेटिक्स में रुचि थी और वह दौड़ में अच्छा प्रदर्शन करती थीं। लेकिन जब उन्होंने भारतीय बॉक्सर डिंको सिंह को अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में पदक जीतते देखा, तब उन्हें बॉक्सिंग की ओर प्रेरणा मिली।

उन्होंने छुप-छुपकर बॉक्सिंग का अभ्यास शुरू किया क्योंकि उनके माता-पिता नहीं चाहते थे कि वह इस खतरनाक खेल में जाएं। बाद में जब उनके माता-पिता को पता चला, तब तक मैरी कॉम अपने खेल के प्रति पूरी तरह समर्पित हो चुकी थीं।

कठिन प्रशिक्षण और शुरुआती संघर्ष

मणिपुर में सीमित सुविधाओं के बावजूद मैरी कॉम (Marry Kom:) ने कड़ी ट्रेनिंग जारी रखी। कई बार उन्हें आर्थिक तंगी के कारण सही भोजन और उपकरण भी नहीं मिल पाते थे। प्रतियोगिताओं में जाने के लिए पैसे की भी समस्या होती थी। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। उनकी मेहनत रंग लाई और जल्द ही वह राज्य स्तर से राष्ट्रीय स्तर तक पहुँच गईं।

राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान

मैरी कॉम (Marry Kom:) ने पहली बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान 2001 में हासिल की, जब उन्होंने वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीता। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

उन्होंने कुल 6 बार वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया, जो किसी भी महिला बॉक्सर के लिए अभूतपूर्व उपलब्धि है। उनकी तेज़ गति, मजबूत पंच और रणनीतिक सोच उन्हें बाकी खिलाड़ियों से अलग बनाती है।

ओलंपिक में ऐतिहासिक पदक

2012 लंदन ओलंपिक में मैरी कॉम (Marry Kom:) ने कांस्य पदक जीतकर भारत का मान बढ़ाया। यह भारतीय महिला बॉक्सिंग के इतिहास का एक सुनहरा पल था। इस पदक ने देशभर की लाखों लड़कियों को खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।

मां बनने के बाद भी शानदार वापसी

मैरी कॉम (Marry Kom:) की खास बात यह है कि उन्होंने मां बनने के बाद भी खेल में शानदार वापसी की। तीन बच्चों की मां होने के बावजूद उन्होंने फिर से अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में जीत हासिल की। यह साबित करता है कि महिला की जिम्मेदारियाँ उसके सपनों को रोक नहीं सकतीं, बल्कि उसे और मजबूत बनाती हैं।

एशियाई और कॉमनवेल्थ खेलों में सफलता

मैरी कॉम (Marry Kom:) ने एशियाई खेलों और कॉमनवेल्थ गेम्स में भी कई पदक जीते। 2014 एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल और 2018 कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल उनके करियर की बड़ी उपलब्धियाँ हैं। इन जीतों ने उन्हें सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में सम्मान दिलाया।

सम्मान और पुरस्कार

भारत सरकार ने मैरी कॉम (Marry Kom:) को कई बड़े सम्मानों से नवाजा है:

  • पद्म श्री
  • पद्म भूषण
  • पद्म विभूषण
  • राजीव गांधी खेल रत्न (अब मेजर ध्यानचंद खेल रत्न)

ये पुरस्कार उनके योगदान और संघर्ष की कहानी कहते हैं।

फिल्म “मैरी कॉम” और लोकप्रियता

2014 में रिलीज़ हुई फिल्म “मैरी कॉम” में अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा ने उनका किरदार निभाया। इस फिल्म ने मैरी कॉम के संघर्ष, पारिवारिक जीवन और खेल यात्रा को बड़े पर्दे पर दिखाया। फिल्म के बाद मैरी कॉम युवाओं के बीच और भी लोकप्रिय हो गईं और वह एक राष्ट्रीय प्रेरणा बन गईं।

समाज के लिए योगदान

मैरी कॉम (Marry Kom🙂 सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि समाज सुधारक भी हैं। उन्होंने मणिपुर में युवाओं के लिए बॉक्सिंग अकादमी शुरू की ताकि गरीब और प्रतिभाशाली बच्चे सही प्रशिक्षण पा सकें। वह चाहती हैं कि आने वाली पीढ़ी को वह संघर्ष न करना पड़े जो उन्हें करना पड़ा।

राजनीति में प्रवेश

बाद में मैरी कॉम ने राज्यसभा सांसद के रूप में भी देश की सेवा की। उन्होंने खेल और महिला सशक्तिकरण से जुड़े मुद्दों को संसद में उठाया। यह दिखाता है कि वह केवल खेल तक सीमित नहीं हैं, बल्कि समाज के हर क्षेत्र में योगदान देना चाहती हैं।

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मैरी कॉम से मिलने वाली प्रेरणा

मैरी कॉम की कहानी हमें सिखाती है:

  • हालात कितने भी मुश्किल हों, हिम्मत नहीं हारनी चाहिए
  • सपनों के लिए संघर्ष जरूरी है
  • महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं
  • परिवार और करियर दोनों को साथ लेकर चला जा सकता है

उनकी जिंदगी लाखों लोगों के लिए प्रेरणा है, खासकर ग्रामीण और गरीब पृष्ठभूमि से आने वाली लड़कियों के लिए।

निष्कर्ष

मैरी कॉम (Marry Kom:) सिर्फ एक बॉक्सर नहीं, बल्कि भारत की बेटियों की ताकत की पहचान हैं। उन्होंने यह साबित किया कि सफलता किसी विशेष वर्ग या शहर की मोहताज नहीं होती, बल्कि मेहनत और जज्बे से हासिल की जाती है।

उनका जीवन संघर्ष, समर्पण और सफलता की अद्भुत मिसाल है। आने वाली पीढ़ियाँ उन्हें हमेशा एक सच्ची योद्धा और प्रेरणास्रोत के रूप में याद रखेंगी।

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